राजस्थान के कई जिलों में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी कर लोगों को सरकारी नौकरियां दिलाने का बड़ा घोटाला सामने आया है। इस मामले में जयपुर और भरतपुर जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालयों की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध पाई गई है। यहां से सबसे अधिक फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए गए। जयपुर और भरतपुर से 4-4, जैसलमेर से 2, जबकि सिरोही, जोधपुर, पाली, बाड़मेर, बांसवाड़ा और श्रीगंगानगर से 1-1 फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने की पुष्टि हुई है।
एसओजी की हेल्पलाइन पर शिकायतें मिलने के बाद जांच शुरू की गई। 66 सरकारी कर्मचारियों को मेडिकल जांच के लिए बुलाया गया, जिनमें से 43 पहुंचे। एसएमएस अस्पताल में बनाए गए मेडिकल बोर्ड ने इनमें से 37 को पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया। यानी इन्होंने दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से बनवाए थे। जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से कई ने श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित और लोकोमोटर डिसएबिलिटी जैसे फर्जी सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया।
एसओजी अब उन डॉक्टरों और अधिकारियों की पहचान करने में जुट गई है, जिन्होंने इन फर्जी प्रमाण पत्रों पर दस्तखत किए। सीएमएचओ कार्यालयों के डॉक्टरों से पूछताछ की जाएगी और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। एसओजी का कहना है कि केवल फर्जी प्रमाण पत्र धारकों पर ही नहीं, बल्कि उन्हें जारी करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी, अब तक 17 थर्ड ग्रेड टीचर, 3 सेकेंड ग्रेड टीचर, 4 सहायक प्राध्यापक, 2 स्टेनोग्राफर, 2 नर्स, 2 पशु चिकित्सक, और अन्य विभागों के कुल 66 अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में हैं। एसओजी को 30 और नए संदिग्धों की जानकारी भी मिली है, जिनकी जांच जल्द की जाएगी, राजस्थान में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों से जुड़ा यह घोटाला न केवल कानून की अवहेलना है, बल्कि असली दिव्यांग जनों के अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है। जांच तेज़ी से जारी है और दोषियों पर जल्द कार्रवाई की उम्मीद है।